Sunday, December 21, 2014

बडबोले बयानों से आजिज मोदी ने दी पद छोडने की धमकी!

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हिंदुत्व और धर्मातरण समेत विभिन्न मसलों पर विवादित बयानों से आजिज आए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने परोक्ष रूप से पद छोडने की धमकी दी है। उन्होंने संघ नेताओं के साथ बैठक में नाराजगी जताते हुए यहां तक कह दिया कि मुझे पद का मोह नहीं है। इसके बाद संघ ने सरकार को ऎसे नेताओं और हिंदू संगठनों से सख्ती करने का ग्रीन सिग्नल दे दिया।

राजस्थान के भाजपा विधायक प्र±लाद गुंजल को मोदी के सस्पेंड करने के आदेश के बाद यह माना जा रहा है कि मोदी ने इस तरह का आदेश देकर बडबोले नेताओं को साफ संदेश दे दिया है।

इससे पहले भाजपा और संघ नेताओं के बीच इस तरह के बयानों को लेकर बातचीत भी हुई है। भाजपा सूत्रों का कहना है कि बीते दो दिनों से न सिर्फ पार्टी नेताओं और संघ के बीच अनौपचारिक बातचीत हुई, बल्कि प्रधानमंत्री ने भी संघ के नेताओं को बताया है कि किस तरह से इस तरह के बयानों की वजह से सरकार की छवि खराब हो रही है। भाजपा का तर्क है कि यह सरकार गवनेंüस के मुद्दे पर चुनकर आई है और इस तरह की बयानबाजी से मोदी सरकार की कट्टर छवि बनने का खतरा है।

सूत्रों के मुताबिक, हालांकि मंगलवार को पार्टी की संसदीय दल की बैठक में भी मोदी ने कडे शब्दों में इस तरह के बयानों से बचने के लिए कहा था लेकिन उसके फौरन बाद ही आदित्यनाथ ने फिर विवादित बयान दे दिया था। इसके बाद फिर से संघ नेताओं से बातचीत की गई। इसके बाद अब बयानबाजी बंद हो गई है। पार्टी नेताओं का कहना है कि संघ को यह बताया गया है कि अगर इसी तरह से विवाद चले तो 2017 का यूपी का मिशन फेल हो सकता है। इससे संघ की योजना को भी धक्का लगेगा। उधर, संघ सूत्रों का कहना है कि संघ के वरिष्ठ नेताओं की तरफ से भी उसकी विभिन्न शाखाओं के प्रमुखों को संदेश दिया गया है कि वे जल्दबाजी न करें। इससे यह संदेश जा रहा है कि मोदी सरकार के सत्ता में आते ही संघ का कब्जा हो रहा है। ऎसे में संघ की छवि भी प्रभावित हो रही है। भाजपा के एक नेता के मुताबिक उस संदेश के बाद ही घर वापसी जैसे कार्यक्रमों को टाला गया है।

पार्टी के एक वरिष्ठ नेता के मुताबिक, बदसलूकी और असंयमित भाषा के इस्तेमाल को लेकर जिस तरह से मोदी ने राजस्थान के विधायक प्र±लाद गुंजल के खिलाफ सख्ती दिखाई है, उसके जरिए भाजपा के बडबोले नेताओं को संदेश दिया गया है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि दरअसल, यूपी के बडबोले नेताओं के खिलाफ ही कार्रवाई की जाती तो इससे यह संदेश जाता कि पिछडे वर्ग से आने वाले नेताओं पर मोदी कार्रवाई कर रहे हैं। लेकिन अब गुंजल के मामले से यह मेसेज देने की कोशिश की गई है कि अगर बडबोलापन दिखाया गया तो कडी कार्रवाई हो सकती है।
source: http://goo.gl/vy3hyG

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