Saturday, December 27, 2014

बढ़ रही है DDA फ्लैट सरेंडर करने वालों की तादाद

डीडीए के फ्लैट लौटाने वाले लोगों की संख्या बढ़ रही है

करीब 25,000 फ्लैटों वाली डीडीए स्कीम के बहुत से आवंटियों को पहली नजर में ही उनके सपनों का घर खटकने लगा है। फ्लैट सरेंडर करने वालों की तादाद तेजी से बढ़ रही है।

इनमें सबसे ज्यादा लोग फ्लैटों को रहने लायक नहीं मान रहे हैं और सिविक इंफ्रास्ट्रक्चर खराब होने का भी हवाला दे रहे हैं। हालांकि फ्लैट लौटाने वाले कई लोग ऐसे भी हैं, जिन्होंने निवेश के मकसद से आवेदन किया था, लेकिन अब उन्हें अगले 5 साल में भी मनचाहे रिटर्न की उम्मीद नजर नहीं आ रही।

एक अधिकारी ने बताया कि शनिवार तक बिना पेनल्टी के करीब 150 लोगों ने फ्लैट सरेंडर करने की अर्जी लगाई थी, जबकि इस बारे में क्विअरीज कई गुना ज्यादा हैं। दस्तावेजों की जांच के लिए लगाए गए वीकेंड कैंप में भी बहुत से लोग सरेंडर की पूछताछ करते रहे। चूंकि अर्नेस्ट मनी से पेनाल्टी कटाकर आगे भी फ्लैट सरेंडर करने का रास्ता खुला है, लौटाने वालों की तादाद बढ़ सकती है।

2360 फ्लैटों वाले द्वारका सेक्टर 23बी में आवंटन पाने वाले वी. के. मिश्रा ने बताया, 'हमारा पति-पत्नी और दो बच्चों का परिवार है। फ्लैट का साइज 34 वर्गमीटर का एलआईजी बताया गया था, लेकिन यह रिहायशी कंडिशन में नहीं है। मात्र एक कमरा है, जिसके साथ अटैच्ड लैट-बाथ और किचन के लिए थोड़ा सा स्पेस है। 18 लाख रुपये में यह बहुत महंगा है। बच्चे बड़े होंगे तो रह पाना मुश्किल होगा।'

एक अन्य अलॉटी ब्रजेश मल्होत्रा ने बताया कि फ्लैट ठीक से बने भी नहीं हैं और रोड कनेक्टिविटी, स्ट्रीट लाइट्स और सिविक सप्लाई दुरुस्त होने में काफी समय लग जाएगा। तब तक हम ईएमआई और किराया दोनों अफोर्ड नहीं कर सकते।

जानकारों का कहना है कि कई लोग ऐसे भी हैं, जो अब पैसे नहीं जुटा पा रहे और बिक्री पर 5 साल का लॉक-इन होने के चलते कोई और विकल्प नहीं सूझ रहा। कुछ लोगों ने यह सोचकर आवेदन किया था कि फ्लैट निकल आया तो किसी सगे-संबंधी को बेच देंगे और रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया पांच साल बाद पूरी हो जाएगी, लेकिन अब डीडीए पजेशन लेटर देने से पहले बायॉमीट्रिक पहचान कर रहा है और आवंटियों को डर है कि पांच साल बाद भी इसके ट्रांसफर में अड़ंगा आ सकता है।

दूसरे इलाकों के फ्लैटों का साइज भी इससे ज्यादा नहीं है। सबसे ज्यादा 10,875 एलआईजी फ्लैट रोहिणी सेक्टर 34-35 में हैं, जिनका बिल्टअप एरिया 33.29 से 33.85 वर्गमीटर है। नरेला के जी-2, जी-8 में इसी साइज के 6422 मकान हैं, जिनकी कीमत 14.94 लाख रुपये है। सीरसपुर में बने 2920 फ्लैटों का साइज 32 वर्गमीटर है और दाम 20.31 लाख रुपये है।

जानकारों का कहना है औसतन 355 वर्गफुट बिल्टअप एरिया के हिसाब से इन फ्लैटों का रेट करीब 4500 रुपये प्रति वर्गफुट है, जिसमें नए बिल्डर फ्लैट भी मिल जाएंगे। चूंकि प्रॉपर्टी का बाजार अभी ठंडा है, कई लोगों का मन बदल रहा है। इस बारे में पूछे जाने पर डीडीए की प्रवक्ता नीमो धर ने सरेंडर रेश्यो को सामान्य बताया और कहा कि इनका फायदा वेटिंग लिस्ट में रखे गए करीब 1200 लोगों को मिल सकता है।
source: http://goo.gl/NscpA4

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