Monday, December 29, 2014

भूमि अधिग्रहण कानून में संशोधन, दिल्ली में बस्तियों का नियमन

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राजधानी दिल्ली में जल्द होने वाले विधानसभा चुनाव को देखते हुए सरकार ने एक बडा कदम उठाते हुए एक जून 2014 तक बनी सभी अनाधिकृत कालोनियों को नियमित करने का निर्णय किया है। केन्द्रीय मंत्रिमंडल की सोमवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में हुई बैठक में इस आशय के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। इससे पहले 2007 तक बनी कालोनियों को नियमित करने का निर्णय किया गया था।

वित्त मंत्री अरूण जेटली ने बैठक के बाद बताया कि इस निर्णय से दिल्ली में रहने वाले 60 लाख से अधिक लोगों को फायदा होगा। सरकार ने संसद के शीतकालीन सत्र में अनधिकृत कालोनियों में सीलिंग पर तीन साल के लिए रोक लगाने से जुडे विधेयक को भी पारित कराया था। उन्होंने कहा कि सरकार ने बुनियादी सुविधाओं के विकास के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया को सरल बनाने के उद्देश्य से भूमि अधिग्रहण कानून में संशोधन का अध्यादेश लाने का फैसला किया है।

उन्होंने कहा कि किसानों को मुआवजे से जुडे प्रावधानों में कोई संशोधन नहीं किया जा रहा है। संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार ने पिछले वर्ष ही भूमि अधिग्रहण कानून बनाया था, जिसमें सौ साल पुराने कानून को बदला गया था।

इसी के साथ केंद्रीय मंत्रिमंडल ने सोमवार को भूमि अधिग्रहण कानून में संशोधन के लिए एक अध्यादेश को मंजूरी दे दी। इसमें कानून में निर्धारित अनिवार्यताओं में से पांच और क्षेत्रों को बाहर रखा गया। केंद्रीय वित्त मंत्री अरूण जेटली ने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि पांच क्षेत्रों में शामिल हैं रक्षा उद्देश्य, ग्रामीण अवसंरचना, सस्ते मकान और गरीबों के लिए आवासीय परियोजना, औद्योगिक गलियारे और अवसंरचना या सामाजिक अवसंरचना (इनमें ऎसी सार्वजनिक-निजी परियोजनाएं भी शामिल होंगी, जिसमें भूमि की मिल्कियत सरकार के पास रहेगी) के लिए भूमि को मंजूरी। जेटली ने कहा कि कानून के मुताबिक मुआवजा राशि ऊंची होगी और पुनर्वास तथा स्थानांतरण कार्य को अंजाम दिया जाएगा, लेकिन इन परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया आसान होगी। इसमें सामाजिक प्रभाव मूल्यांकन, खाद्य सुरक्षा मुल्यांकन और 80 फीसदी भूस्वामियों की सहमति तथा कानून में उçल्लखित अन्य कई प्रावधानों को नहीं अपनाया जाएगा।
source: http://goo.gl/kCQyLi

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