भारतीय रिजर्व बैंक ने 2
दिसंबर को हुई मॉनिटीरी पॉलिसी रिव्यू में ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं
की है। आरबीआई गर्वनर रधुराम राजन ने अगले साल की शुरुआत में ब्याज दरों
में कटौती के संकेत दिए है। इसके बावजूद बैंकों ने अभी से डिपॉजिट रेट कम
करना शुरू कर दिया हैं। आने वाले दिनों में दूसरे बैंक भी डिपॉजिट रेट्स कम
करेंगे। अब जब बैंक इंट्रेस्ट रेट में कटौती करने की तैयारी कर रहे हैं,
तो वर्तमान इंट्रेस्ट रेट पर निवेश को फि़क्स्ड और रेकरिंग डिपॉजिट में लॉक
करना होगा फायदेमंद।
कहां करें निवेश
अभी भी कुछ बैंक 9 फीसदी का ब्याज फि़क्स्ड डिपॉजिट पर दे रहे हैं।
वहीं, सीनियर सिटीजंस यानि 60 साल के ऊपर के लोगों को इस रेट से 0.25 से
0.50 फीसदी अधिक है। अगर फि़क्स्ड डिपॉजिट के लिए एकमुश्त पैसा नहीं है तो
रेकरिंग डिपॉजिट चुन सकते है। ज्यादातर बैंक 10 साल के लिए रेकरिंग
डिपॉजिट की सुविधा देते है। रेकरिंग डिपॉजिट में हर महीने फि़क्स्ड निवेश
किया जाता है, जिस पर तय ब्याज मिलता है। रेकरिंग डिपॉजिट का समय पूरा होने
पर एकमुश्त रकम मिलती है।
रेकरिंग डिपॉजिट में निवेश की सीमा
रेकरिंग डिमॉजिट में अधिकतर बैंकों की लिमिट 100 रुपए से शुरू है,
जबकि मैक्सिमम लिमिट 15 लाख रुपए होती है। इस स्कीम में निवेश की अवधि 6
महीने से लेकर 10 साल तक होता है। वहीं, सीनियर सिटीजंस को रेकरिंग डिपॉजिट
पर 0.5 फीसदी अधिक ब्याज मिलता है। रेकरिंग डिपॉजिट में निवेश शुरू करने
के बाद बैंक ब्याज में बदलाव नहीं कर सकते हैं। ऐसे में यदि बैंक आने वाले
महीनों में ब्याज कम भी करते हैं तो वे इस पर ब्याज नहीं बदल सकते हैं।
रेकरिंग डिपॉजिट के नियम
रेकरिंग डिपॉजिट को लेकर बैंकों ने नियम को सख्त बना रखा है। रेकरिंग
डिपॉजिट खोलने के लिए सेविंग अकाउंट की जरूरत होती है। अकाउंट में 5000 से
10000 रुपए का बैलेंस मेनटेन होना चाहिए। यदि किसी कारण बस महीने की तय
तारीख पर पैसा जमा नहीं करते है तो बैंक इसके एवज में पेनाल्टी लगा सकता
है। यह पेनाल्टी बैंक के ऊपर निर्भर करता है। रेकरिंग डिपॉजिट का पेमेंट
मिस करने पर एचडीएफसी बैंक 2 फीसदी पेनाल्टी चार्ज करता है, एसबीआई 5 साल
की अवधि वाले रेकरिंग डिपॉजिट पर प्रति 1000 रुपए 15 रुपए का पेनाल्टी लेता
है। अगर किसी कारण बस दो लगातार पेमेंट जमा नहीं करते हैं तो बैंक रेकरिंग
डिपॉजिट को बंद भी कर सकता है।
source: http://goo.gl/6zhs6H






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