केंद्र सरकार अगले हफ्ते डीजल व रसोई गैस के दाम बढ़ाने
का फैसला कर सकती है। पेट्रोलियम मंत्री वीरप्पा मोइली ने शुक्रवार को इसके
स्पष्ट संकेत देते हुए कहा कि सरकार अब इसमें ज्यादा देर नहीं करेगी। इसके
जरिये सरकार की कोशिश सब्सिडी वाले रसोई गैस सिलेंडर का कोटा बढ़ाने के
बीच सामंजस्य बनाने की होगी। इससे तेल कंपनियों के घाटे में भी कमी आएगी और
सिलेंडर का कोटा बढ़ाने के बावजूद सरकार का सब्सिडी बोझ भी नहीं बढ़ेगा।
मोइली ने कहा कि राजकोषीय घाटे के नियंत्रण पर केलकर समिति की सिफारिशों को अमल में लाने पर गंभीरता से विचार हो रहा है। इस बारे में बहुत जल्द फैसला होगा।
माना जा रहा है कि डीजल की कीमत में हर महीने या एक निश्चित अंतराल पर लगातार वृद्धि करने के विजय केलकर की सिफारिशों पर अगले हफ्ते कांग्रेस की कोर कमेटी और राजनीतिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति की अलग अलग बैठकों में विचार होगा। इसके अलावा कांग्रेस अन्य सहयोगी दलों को भी इस फैसले पर मनाने की कोशिश करेगी।
जानकारों का कहना है कि पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों पर भी प्रधानमंत्री कार्यालय के निर्देशों के मुताबिक ही फैसला होगा। पिछले दिनों रेल किराये में वृद्धि के लिए पीएमओ के सुझाव को आधार बनाने की बात कही जा रही है। केलकर समिति ने अपनी रिपोर्ट पिछले वर्ष सितंबर में सरकार को सौंपी थी। इसमें डीजल की खुदरा कीमत में एकमुश्त चार रुपये और बाद में हर महीने एक रुपये की वृद्धि करने का प्रस्ताव किया गया था। समिति ने रसोई गैस की कीमत में भी 50 रुपये प्रति सिलेंडर की वृद्धि का सुझाव दिया था।
राजकोषीय घाटे को 5.3 फीसद पर लाने के लिए समिति ने इस कदम को बेहद जरूरी बताया था। सरकार के पास पेट्रोलियम सब्सिडी के बढ़ते बोझ [चालू वित्त वर्ष के लिए अनुमानित 1,60,000 करोड़ रुपये] को कम करने के अलावा और कोई चारा नहीं है।
मोइली ने कहा कि राजकोषीय घाटे के नियंत्रण पर केलकर समिति की सिफारिशों को अमल में लाने पर गंभीरता से विचार हो रहा है। इस बारे में बहुत जल्द फैसला होगा।
माना जा रहा है कि डीजल की कीमत में हर महीने या एक निश्चित अंतराल पर लगातार वृद्धि करने के विजय केलकर की सिफारिशों पर अगले हफ्ते कांग्रेस की कोर कमेटी और राजनीतिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति की अलग अलग बैठकों में विचार होगा। इसके अलावा कांग्रेस अन्य सहयोगी दलों को भी इस फैसले पर मनाने की कोशिश करेगी।
जानकारों का कहना है कि पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों पर भी प्रधानमंत्री कार्यालय के निर्देशों के मुताबिक ही फैसला होगा। पिछले दिनों रेल किराये में वृद्धि के लिए पीएमओ के सुझाव को आधार बनाने की बात कही जा रही है। केलकर समिति ने अपनी रिपोर्ट पिछले वर्ष सितंबर में सरकार को सौंपी थी। इसमें डीजल की खुदरा कीमत में एकमुश्त चार रुपये और बाद में हर महीने एक रुपये की वृद्धि करने का प्रस्ताव किया गया था। समिति ने रसोई गैस की कीमत में भी 50 रुपये प्रति सिलेंडर की वृद्धि का सुझाव दिया था।
राजकोषीय घाटे को 5.3 फीसद पर लाने के लिए समिति ने इस कदम को बेहद जरूरी बताया था। सरकार के पास पेट्रोलियम सब्सिडी के बढ़ते बोझ [चालू वित्त वर्ष के लिए अनुमानित 1,60,000 करोड़ रुपये] को कम करने के अलावा और कोई चारा नहीं है।






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